ध्यान रहे अब अपनी गर्दन को उपर की ओर उठा लें और ठोडी को जमीन से लगा लें। इस स्थिति में कुछ देर रुकिए, फिर पूर्व स्थिति में वापस लौटिए। एक बात का ध्यान रखें कि आपको आराम से अपने पैरों को ऊपर उठाना है ना की झटके के साथ। फिर आराम से धीरे-धीरे पैरों को नीचे की और लाएं। इस आसन को आप 10 बार दोहरा सकते हो।
जो महिला गर्भवती है उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए। हर्निया व आंत के कष्ट से पीड़ित व्यक्ति को बिना सलाह के इस आसन को नहीं करना चाहिए।
शलभासन का अभ्यास करने से कमर लचीली बनती है और छाती चौड़ी होती है, तथा यह शरीर को संतुलन में सहायक है। इससे उदर व उससे संबंधित अंगों पर विशेष प्रभाव पड़ता है। इस आसन के करने से रक्त संचार की क्रिया सुचारू होती है।
यह आसन तनाव को कम करने में मदद करता है। शलभासन करने से स्मरण शक्ति बढ़ती है और मानसिक निराशा दूर होती है। वजन को कम करने में मदद करता है साथ ही इससे मेटाबॉलिज्म नियंत्रित में रहता है।
डायबिटीज के रोगियों के लिए भी यह लाभप्रद है। इस आसन के करने से कमर और पीठ के स्नायु मजबूत होते हैं। इसके साथ ही इससे पैरों को मजबूती मिलती है। साथ ही यह आसन गर्भाशय संबंधी परेशानी को दूर करता है। इससे कलाई, जांघों, कंधे, पैर, पिंडली की मांसपेशियों और कूल्हों को भी मजबूती मिलती है।
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